Stotras and Sahasarnam For The Navgrah

Stotras and Sahasarnam

II The Navgrah II

 

navgrah stotra

 

II The Navgrah II

 

The Navgrah Mantra

Navgrah Mantra is a combined Mantra for all the nine planets. This is an extremely useful & beneficial Mantra, since it’s recital, on the one hand, strengthens benefic planets and increases their positive influences and on the other, propitiates malefic planets which not only reduces their malefic affects but also start blessing with their benefic affects, instead. Navgrah Mantra is recommended for all, particlularly those whose benefic planets (mitra grahas) are weak and therefore unable to deliver. The malefic planets in their case are quite potent to do maximum damage. Navgrah Mantra should be recited life-long to ensure that one always gets optimum benefits from all the planets.

II नवग्रह स्तोत्र II 

अथ नवग्रह स्तोत्र II

श्री गणेशाय नमः II

जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महदद्युतिम् I

तमोरिंसर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम् II १ II

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् I

नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम् II २ II

धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांति समप्रभम् I

कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणाम्यहम् II ३ II

प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम् I

सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् II ४ II

देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम् I

बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् II ५ II

हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् I

सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् II ६ II

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् I

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम् II ७ II

अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम् I

सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् II ८ II

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम् I

रौद्रंरौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् II ९ II

इति श्रीव्यासमुखोग्दीतम् यः पठेत् सुसमाहितः I

दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्न शांतिर्भविष्यति II १० II

नरनारी नृपाणांच भवेत् दुःस्वप्ननाशनम् I

ऐश्वर्यमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनम् II ११ II

ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुभ्दवाः I

ता सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासोब्रुते न संशयः II १२ II

II इति श्रीव्यास विरचितम् आदित्यादी नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णं II

 

 नवग्रह पूजा विधि

 

नवग्रह-पूजन के लिए सबसे पहले ग्रहों का आह्वान किया जाता है। उसके बाद उनकी स्थापना की जाती है। फिर बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करते हुए दाएँ हाथ से अक्षत अर्पित करते हुए ग्रहों का आह्वान किया जाता है। इस प्रकार सभी ग्रहों का आह्वान करके उनकी स्थापना की जाती है। इसके उपरांत हाथ में अक्षत लकेर मंत्र उच्चारित करते हुए नवग्रह मंडल में प्रतिष्ठा के लिये अर्पित करें। अब मंत्रोच्चारण करते हुए नवग्रहों की पूजा करें। ध्यान रहे पूजा विधि किसी विद्वान ब्राह्मण से ही संपन्न करवायें। पूजा नवग्रह मंदिर में भी की जा सकती है।

 

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